SRI NARAYAN AUTO SPARE

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आज सुबह जब मोबाइल का अलार्म बजा तो गूगल ने मुझे नवरात्र और अष्टमी पूजा का अभिनंदन किया ( मैं रोज का गूगल में सेट किया हु...
22/10/2023

आज सुबह जब मोबाइल का अलार्म बजा तो गूगल ने मुझे नवरात्र और अष्टमी पूजा का अभिनंदन किया ( मैं रोज का गूगल में सेट किया हुआ हूं तो गूगल रोज के हिसाब से बोलता है और मैसेज करता है, वरना मैं कोई गूगल का रिश्तेदार नहीं हूं) तो मन में खयाल आया इस दुर्गा पूजा लोगों के मां के चरणों में कितने फूल अर्पण किए, कितने मिठाई अर्पण किए,दुर्गा पूजा में कितने का पंडाल बना, खैर इस पर ज्यादा नहीं लिखूंगा ये हमारी आस्था है हमे करना भी चाहिए हमें गर्व है की हम हिंदू धर्म में पैदा हुए और इसके प्रति मुझे गहरी आस्था है, अब मुद्दे पर आते है:-
जितने तन मन धन लगाकर हम इस 10 दिन मां के लिए समर्पित रहते है, इस 10 दिन के अलावा क्यूं नहीं रहते है।
मां के रूप को इस 10 दिन जितना महत्व देते है इसके अलावा क्यूं नहीं देते है। 2 दिन के बाद मां की चुनरी कही गिरा देखते है तो पैरों से रौंद देते है, कहीं मां की प्रतिमा या चित्र गिरा मिलता है तो हम उसका सम्मान नहीं करते है।
इसी दशहरा या दीपावली में घरों की सफाई होगी बहुत सारे कैलेंडर घर से बाहर होगी जो की किसी न किसी हमारे देवी देवताओं का होगा उसे कबाड़ वाले को बेच देते है या कचरा में फेक देंगे, उसे हम सम्मान के साथ किसी तालाब या नदी में थोड़ा सा टाइम निकाल कर प्रवाहित क्यों नहीं करते है।
आखिर वो भी तो हमारे आराध्य की प्रतिमा है।
सावन आता है सारे लोग तोलिया, गमछा, गंजी भगवान शिव के फोटो वाला ले कर कच्छा के रूप में इस्तेमाल करते है क्या ये हमारे आराध्य का अपमान नहीं है ।

क्यों नही हम सावन में भगवान का फोटो वाला तोलिया या पेंट प्लेन ही खरीदें, हा कलर को चूज करना है।
हमें लगता है लगता क्या है की हम खरीदते है इसी लिए कंपनी बनाती है और और हमारे आराध्य का अपमान होता है,
कुछ दिन पहले खबर आई थी एक चप्पल कंपनी अपने चप्पल पर भगवान गणेश का फोटो डाल दिया था।

आखिर हम हिंदुओं के देवताओं का इतना अपमान बार बार क्यों।

इसका एक ही कारण है हम खुद ।

अगर आप लोगों को अच्छा लगे या तो थोड़ा सोचिए जरूर ।
पूजा खत्म होगा देवताओं की फोटो लगी हुई अगरबती के डब्बे रोड पर फेके जायेंगे और हम लोग पैर से रौंदते चले जायेंगे, क्यों नहीं उस अगरबती को ही न खरीदें जिस पर देवताओं के चित्र लगे हो,
उस कपड़े को ही न खरीदे जिस पर हमारे आराध्य का फोटो लगा हो, क्यों नहीं उस प्रोडक्ट को ही न खरीदें।

मेरे पोस्ट से अगर 10 लोगों को भी अपने आराध्य के लिए सम्मान जागता है और 10 लोग भी अगर भगवान की फोटो लगी हुई प्रोडक्ट नहीं खरीदते है तो मुझे लगेगा की मैं धन्य हो गया।

जय माता दी
दुर्गापूजा की ढेर सारी शुभकामनाएं

जो औरते घर में बुजुर्ग सास को रोटी तक नहीं पूछती, सास को लात से मरने को तैयार रहती है, घर में एक एक सुई की नोक तक संभाल ...
21/10/2023

जो औरते घर में बुजुर्ग सास को रोटी तक नहीं पूछती, सास को लात से मरने को तैयार रहती है, घर में एक एक सुई की नोक तक संभाल संभाल कर घर को घर बनाने वाली सास अगर बहु को बताए बिना कुछ करती है या किसी को कुछ देती है तो खाना पीना बंद करने वाली बहु, सास को घर के किसी कोने में रखने वाली, सास को वृद्धा आश्रम में भेजने वाली बहु.........

नवरात्रि का व्रत किस माँ को खुश करने के लिए रखती हैं..!!
कड़वा हैं पर सत्य......!!!!!!

 #दोस्ती इंसान के जीवन के एक बहुत ही खास रिश्ता होता है। इंसान के जन्म होते ही उसके साथ कई रिश्ते जुड़ जाती है। पर  #दोस्...
21/10/2023

#दोस्ती इंसान के जीवन के एक बहुत ही खास रिश्ता होता है।
इंसान के जन्म होते ही उसके साथ कई रिश्ते जुड़ जाती है। पर #दोस्ती का रिश्ता कोई भी इंसान खुद ही बनाता है।

नवरात्रा और दुर्गा पूजा की ढेर सारी शुभकामनाएं।
जय माता दी

आज एक महीने पहले की बात है, मैं अपनी बाइक से जा रहा था, ऑफिस से लौटने का समय था। रोड पर भीड़ बहुत ज्यादा थी, मेरी बाइक के...
17/10/2023

आज एक महीने पहले की बात है, मैं अपनी बाइक से जा रहा था, ऑफिस से लौटने का समय था। रोड पर भीड़ बहुत ज्यादा थी, मेरी बाइक के आगे एक कार बहुत धीरे- धीरे चल रही थी... मैंने खीझते हुए हॉर्न बजाया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा.... मन ही मन कार वाले को कहा चलाना नहीं आता तो क्यों गाड़ी ले आते हो.....।

(तभी कार पर लगे स्टीकर पर नजर पड़ी जिस पर लिखा था कि "कार में दिव्यांग है धैर्य रखें")

स्टीकर पर नजर जाते ही सबकुछ बदल गया...दिमाग शांत हो गया..गाड़ी धीरे हो गयी और उस गाडी के ड्राइवर के प्रति एक अलग तरह की फीलिंग आ गयी कि इन्हें दिक्कत ना आये.....
-
खैर घर थोड़ा देर से पहुँचा और सोते समय घटना को याद कर चिंतन किया कि एक स्टीकर मात्र ने सब कुछ बदल दिया, मेरा सोचने का तरीका बदल गया..... मैं इतना शांत और केयरिंग हो गया....

एक स्टीकर हमारी भावनाओं को बदल सकता है, हम ज्यादा धैर्यवान और केयरिंग हो सकते हैं, हमारा नजरिया बदल सकता है ।
बस उस स्टीकर को खोजने भर की देर है।

दिनभर ना जाने कितने लोगों से मिलते हैं उनमें से ना जाने कितने लोग अपनी व्यक्तिगत, शारिरिक और पारिवारिक परेशानियों से जूझ रहे हैं....।
लेकिन हमें मालूम नहीं होता क्योंकि उनके माथे पर कोई स्टीकर नहीं लगा होता कि वो परेशान है ।
किसी की जॉब चली गयी है ।
किसी ने अपने प्रिय व्यक्ति को खो दिया है ।
कोई गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं ।
किसी के पास पैसा नहीं है ।
कोई भूखा है। आदि इत्यादि......
सारे लोगों के अंदर कुछ न कुछ दिव्यांगता है उसे समझने की जरूरत है।
कौन किस परेशानी को झेल रहा है कोई नहीं जानता, ना जाने सामने वाला व्यक्ति अपनी मुस्कुराहट या हँसी के पीछे कितने गम छुपाये इस मतलबी दुनिया में घूम रहा है...

हम सभी अपनी जिंदगियों में एक अदृश्य सा युद्ध लड़ रहे होते हैं जिसकी जानकारी किसी दूसरे को नही होती.....
हम बस इतना कर सकते है कि दूसरों के प्रति, दयालु, धैर्यवान और सहनशील बने, दुसरो के प्रति सहानभूति रखें । किसी की परेशानी में हम इतना तो कर ही सकते हैं 🙏

हम इंसान बनकर सामने वाले को समझें,
उसे झिड़कने के बजाय उसे प्यार से बात करें प्यार से देखें प्यार से समझें, शायद इस से ज्यादा मानवता हो ही नहीं सकती है।
तो आइए इस नवरात्रा मन में प्रन लें मां से आशीर्वाद मांगे की हे मां मुझे दूसरे के मन के स्टीकर को समझने की शक्ति प्रदान करें। धैर्यवान बन ने की शक्ति दे।

जय माता दी।
🙏🙏🙏🙏

 #औरत से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं की वो आपसे पूरी तरह खुश है  तो आप नादानी में हैं...।ये औरत के मूल में है ही...
16/10/2023

#औरत से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं की वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में हैं...।
ये औरत के मूल में है ही नहीं...
अगर आप बहुत ज्यादा उसका केयर करते है तो उससे भी ऊब जाएगी... और जल्दी ही कह देगी बहुत सट रहे हो, यानी की केयर भी उसे पसंद नहीं है।
अगर आप बहुत उग्र हैं तो वो उससे भी बिदक जाएगी... कहेगी आपको बोलने ही नहीं आता है।
अगर आप बहुत ज्यादा विनम्र हैं तो वो उससे भी चिढ जाएगी... आपको तो कोई उल्लू बना देता है, दुनिया की परख ही नहीं है आपको।
अगर आप उससे बहु त ज्यादा बात करते हैं तो वो आपको टेक इट फौर ग्रांटड लेने लगेगी ... आपको तो बोलने का तमीज ही नहीं है इतना कही आदमी बोलता है।
अगर आप उससे बहुत कम बात करते हैं तो वो मान लेगी कि आपका चक्कर कहीं और चल रहा है... आपको तो मेरा फिकर ही नहीं है आपको दूसरी मिल गई है इसी लिए हमसे बात करने में अच्छा ही नहीं लगता है। मेरे लिए तो समय ही नहीं है।

यानी आप कुछ भी कर लीजिए वो संतुष्ट नहीं हो सकती...

ये उसका स्वभाव है... यही उसे भगवान ने दिया है।
वो एक ऐसा डेडली काॅम्बीनेशन खोजती है जो बना ही नहीं है, और कभी बन ही न सकता हो...

ठीक वैसे ही जैसे कपड़ा खरीदने जाती है तो कहती कि इसी कलर में कोई दूसरा डिजाइन दिखाओ, इसी डिजाइन में कोई दूसरा कलर दिखाओ...

कपड़े का गट्ठर लगा देती है... #दुकानदार गाली भी नहीं दे सकता क्योंकि ग्राहक है, और ग्राहक तो भगवान है।
बहुत परिश्रम के बाद एक पसंद भी आ गया तो भी संतुष्ट नहीं हो सकती...
आखिरी तक सोचती है कि इसमे ये डिजाइन ऐसे होता तो परफैक्ट होता...
पहन लेने के बाद भी वो संतुष्ट नहीं होती है, पहनने के बाद भी वो डिजाइन खोजती रहती रहती है यही कारण है की आज कल #बॉर्डर और #इंब्रोएडरी का दुकान फल फूल रहा है।

इन सबके बावजूद एक बहुत बड़ी खूबी भी है औरत के अंदर एक बार उसे कुछ पसंद आ गया तो उसे आखिरी दम तक सजो के रखती है
वो चाहे रिश्ते हो या चूड़ी...

रंग उतर जाएगा, चमक खत्म हो जाएगी पर खुद से जुदा नहीं करेगी....बस यही खूबी औरत को विशिष्ट बनाती है....
लेकिन ये लास्ट वाला विशिष्ट गुण कभी कभी हजारों साल में एक बार होता है।

(किसी को बुरा लगे तो मेरा गुनाह माफ करे)
.✍️❣️
@सहर बादशाहों का शहर त्रिवेणीगंज
Shantanu netam

दिल्ली वाले दोस्त की जुबान और मेरी कलम👇👇👇पिछले कुछ महीनों पहले में नोएडा के दो रेस्ट्रोरेंट में गया...जहां साज सजावट खूब...
12/10/2023

दिल्ली वाले दोस्त की जुबान और मेरी कलम👇👇👇

पिछले कुछ महीनों पहले में नोएडा के दो रेस्ट्रोरेंट में गया...जहां साज सजावट खूब थी फोटो खिंचाने के लिए भी बढ़िया जगह थी, लेकिन खाना हद से ज्यादा महंगा था और बेस्वाद भी।
वेटर मुस्कराते हुए पानी की बोतल रख के गया वो भी 60 रुपये की थी। कोई भी सब्जी 400 रुपये से कम नहीं थी यहां तक कि अरहर की दाल भी 450 की थी बस नाम कुछ अलग सा था अब सोचिए 150 रुपये किलो की दाल के कोई 400-500 रूपये ले रहा है तो वो क्या अलग दे रहा होगा?
एक रोटी 80 रूपये की थी। यहां जाने के बाद मन में ठान लिया है कि अब इन महंगे रेस्ट्रोरेंट में कभी नहीं जाना है...आखिर हम स्वाद के लिए ही तो बाहर खाना खाते हैं वो भी नहीं मिलता और महंगा अलग से।
हालांकि दोनों जगह नए लड़के-लड़कियों की खूब भीड़ थी जो अपने-अपने ऑफिस से वहां आए थे...उनमें से एक को कहते सुना था, यार यही जिंदगी जीने के लिए खूब पैसा कमाना है। ये थोड़ी अजीब सोच नहीं है....हम अपने घरों से दूर दिनरात पैसा कमाने में लगे हैं जिससे हमारे पास इतने पैसे आ जाएं कि हम इन महंगे रेस्ट्रॉं में जाकर "100 रूपये की चीज 600-700 में खरीद सकें" ये कैसा जुनून है?
क्या ये सच में लैविश लाइफ है? दिल्ली-एनसीआर में ऐसे महंगे रेस्ट्रोरेंट की संख्या बढ़ती जा रही है और यहां जाने वाले युवाओं की भीड़ भी...जिन्हें पैसा खर्च करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी है बस कमा कर सप्ताह के आखिरी दिन की शाम को इन रेस्ट्रोरेंट में दे देना है और सुबह फिर से कमाने में लग जाना है। जबकि इसी दिल्ली में बहुत कुछ है...जहां आप कम पैसों में भी अच्छे से अच्छा खाना खा सकते हैं कुछ नया देख सकते हैं सीख सकते हैं।
1. आंध्रभवन👉 जहां बिल्कुल अलग माहौल देखने को मिला...अलग भाषा अलग खाना...जहां बड़े-बड़े लोगों को खाने के लिए लाइन में लगे हुए देखा...जहां लोग बिना शर्माए चम्मच के बजाए हाथ से ही चावल खा रहे थे...ऐसा लगा हम थोड़ी देर के लिए आंध्रप्रदेश में ही चले गए हैं...190 रूपये में थाली मिली जो अब महंगी हुई है पहले और भी सस्ती थी जिसमें कई तरह की चीजें थीं और इस 190 रूपये में कोई जितना चाहे उतना खा सकता है ।
केरला भवन है,
महाराष्ट्र सदन है
बिहार भवन जहां बिहारी मसालेदार स्वाद मिलता है ।
साथ ही हर राज्य के भवन हैं...जहां उन राज्यों में खाया जाने वाला खाना मिलता है...यहां कोई भी जा सकता है।

(दिल्ली वाले दोस्तों के लिए)

#दिल्ली

29/09/2023

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बाज पक्षी जिसे हम ईगल या शाहीन भी कहते है। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज ...
16/09/2023

बाज पक्षी जिसे हम ईगल या शाहीन भी कहते है। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है। पक्षियों की दुनिया में ऐसी Tough and tight training किसी और की नही होती।

मादा बाज अपने चूजे को लेकर लगभग 12 Km ऊपर ले जाती है। जितने ऊपर अमूमन हवाई जहाज उड़ा करते हैं और वह दूरी तय करने में मादा बाज 7 से 9 मिनट का समय लेती है। यहां से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा। उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है ? तेरी दुनिया क्या है ? तेरी ऊंचाई क्या है ? तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है।

धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग 2 Km उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है। 7 Kmt. के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते हैं। लगभग 9 Kmt. आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है। यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है।

अब धरती से वह लगभग 3000 मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं सीख पाया है। अब धरती के बिल्कुल करीब आता है जहां से वह देख सकता है अपने इलाके को। अब उसकी दूरी धरती से महज 700/800 मीटर होती है लेकिन उसका पंख अभी इतना मजबूत नहीं हुआ है की वो उड़ सके। धरती से लगभग 400/500 मीटर दूरी पर उसे अब लगता है कि उसके जीवन की शायद अंतिम यात्रा है। फिर अचानक से एक पंजा उसे आकर अपनी गिरफ्त मे लेता है और अपने पंखों के दरमियान समा लेता है।

यह पंजा उसकी मां का होता है जो ठीक उसके उपर चिपक कर उड़ रही होती है। और उसकी यह ट्रेनिंग निरंतर चलती रहती है जब तक कि वह उड़ना नहीं सीख जाता। यह ट्रेनिंग एक कमांडो की तरह होती है, तब जाकर दुनिया को एक बाज़ मिलता है अपने से दस गुना अधिक वजनी प्राणी का भी शिकार करता है।

हिंदी में एक कहावत है... "बाज़ के बच्चे मुँडेरों पर नही उड़ते....."

बेशक अपने बच्चों को अपने से चिपका कर रखिए पर उसे दुनियां की मुश्किलों से रूबरू कराइए, उन्हें लड़ना सिखाइए। बिना आवश्यकता के भी संघर्ष करना सिखाइए।

वर्तमान समय की अनन्त सुख सुविधाओं की आदत व अभिवावकों के बेहिसाब लाड़ प्यार ने मिलकर, आपके बच्चों को "ब्रायलर मुर्गे" जैसा बना दिया है जिसके पास मजबूत टंगड़ी तो है पर चल नही सकता। वजनदार पंख तो है पर उड़ नही सकता क्योंकि..

"गमले के पौधे और जमीन के पौधे में बहुत फ़र्क होता है।"
अहिंसा परमो धर्म ।
धर्म हिंसा तदैव च ।

साभार

जंगली भांग 👇1. एक हेक्टर भांग 25 हेक्टर जंगल जितना ऑक्सीजन छोड़ता है। भांग 4 महीने में और पेड़ 20-50 साल में तैयार होता ...
05/09/2023

जंगली भांग 👇

1. एक हेक्टर भांग 25 हेक्टर जंगल जितना ऑक्सीजन छोड़ता है। भांग 4 महीने में और पेड़ 20-50 साल में तैयार होता है।

2. एक हेक्टेयर भांग से 4 हेक्टेयर जंगल जितना कागज मिलता है।

3. पेड़ 3 बार रीसाइक्लेबल पेपर बनाता है जबकि भांग 8 बार रीसाइक्लेबल पेपर बनाता है। हेम्प पेपर सबसे अच्छा और सबसे टिकाऊ होता है।

5. भांग के पौधे एक विकिरण जाल है। भांग के पौधे हवा को शुद्ध करते हैं।

6. दुनिया में कहीं भी भांग पैदा हो सकती है, इसे पानी की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा, क्योंकि यह परजीवी से खुद को बचा सकता है, इसे कीटनाशक की भी आवश्यकता नहीं होती है।

7. हेम्प टेक्सटाइल अपनी खुद की प्रॉपर्टीज पर फ्लैक्स उत्पादों का प्रदर्शन करते हैं।

8. भांग के नारे, रस्सियों, बैग, जूते, टोपी के उत्पादन के लिए एक आदर्श पौधा है।

9. भांग दवा नहीं है और इसकी खेती स्वतंत्र रूप से की जा सकती है।

10. भांग के बीज का प्रोटीन वैल्यू बहुत ज्यादा है और उसमें निहित दो फैटी एसिड प्रकृति में कहीं और नहीं है।

11. भांग का उत्पादन सोया से बहुत सस्ता है।

12. जो जानवरों भांग खाते हैं उन्हें हार्मोन सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है।

13. सभी प्लास्टिक उत्पादों को भांग के पौधे की मदद से हटाया जा सकता है, भांग प्लास्टिक पर्यावरण के अनुकूल और पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल है।

14. इमारतों के थर्मल इन्सुलेशन के लिए भी भांग का उपयोग किया जा सकता है, यह टिकाऊ, सस्ता और लचीला होता है।

15. भांग से साबुन और प्रसाधन सामग्री बनाया जा सकता है, भांग पानी को प्रदूषित नहीं करता है, इसलिए ये पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है।

#भारत_के_गौरवशाली_इतिहास
#भांग

आज एक छोटा सा कहानी वाला जोक #नेताजी एक नेताजी की दोस्ती एक बहुत ही बड़ीफिल्म अभिनेत्री से हो गई ।अभिनेत्री बड़ी ही भली ...
09/08/2023

आज एक छोटा सा कहानी वाला जोक
#नेताजी

एक नेताजी की दोस्ती एक बहुत ही बड़ी
फिल्म अभिनेत्री से हो गई ।
अभिनेत्री बड़ी ही भली और सुंदर थी,
नेता जी बड़े खुश थे, उनके साथ पार्टी में जाना घूमना खाना पीना चल रहा था। धीरे धीरे कुछ महीनों के बाद नेताजी को लगने लगा कि उन्हें अभिनेत्री से प्यार हो गया है, उन्होंने मन ही मन तय किया कि वे उससे शादी करेंगे ।

पर चूंकि लड़की फिल्मों में काम करती थी, और उसका मिलना-जुलना काफी लोगों से था, अतः नेताजी ने सोचा कि शादी का प्रस्ताव रखने के पहले उसके चरित्र, परिवार आदि बारे में जानकारी ले लेना बेहतर होगा, आखिर शादी की बात थी उसमें भी नेताजी सामाजिक आदमी थे। उन्होंने एक प्लान बनाया।

उन्होंने अपने सेक्रेटरी से लड़की के पीछे एक प्राइवेट जासूस लगाने को कहा, साथ ही सख्त हिदायत दी कि, जासूस को यह पता नहीं चलना चाहिए कि, "वह यह काम मेरे लिए कर रहा है"।

लगभग दो महीनों की छानबीन के बाद जासूस की रिपोर्ट सेक्रेटरी के माध्यम से नेताजी को मिली, जो कुछ इस तरह से थी !!

(आगे हंसना बिलकुल मना है)

"लड़की का चरित्र एकदम बेदाग़ है, आज तक उसका किसी के साथ कोई अफेयर नहीं रहा है। लड़की का परिवार, उसके रिश्तेदार और दोस्त सभी बड़े ही भले एवं संभ्रात लोग हैं!"

परन्तु... ऐसी जानकारी मिली है कि पिछले कुछ महीनों से यह लड़की अक्सर एक निहायत ही चरित्रहीन एवं घटिया किस्म के नेता के साथ देखी जा रही है...!!
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊

भाटिया साहब को तो आप जानते ही होंगे, नहीं जानते हैं अरे भाई, राजीव हरि ओम भाटिया। अब भी नहीं समझे अरे बाबा अक्षय कुमार! ...
06/08/2023

भाटिया साहब को तो आप जानते ही होंगे, नहीं जानते हैं अरे भाई, राजीव हरि ओम भाटिया। अब भी नहीं समझे अरे बाबा अक्षय कुमार! अब तो नहीं बताना पड़ेगा न , तो बात भाटिया साहब की ।
अगर भाटिया साहब को आप ब्रह्मा भी बना दो, तब भी वह चारों मुँह से एक ही इक्स्प्रेशन देने का कारनामा कर दिखाएंगे।

मज़ाक की बात अलग, पर OMG2 का ट्रैलर वाकई शानदार तरीके से एडिट किया गया है। जबकि पंकज त्रिपाठी जी पंकज त्रिपाठी ही लग रहे हैं, राजीव भाटिया भाई अक्षय कुमार ही लग रहे हैं, फिर भी ट्रेलर देखकर आनंद आ रहा है।

हालाँकि OMG2 trailer की शुरुआत में भगवान शिव का नंदी को इन्स्ट्रक्शन देना, add on सा लगता है। ऐसा लगता है कि लास्ट मोमेंट पर इसे डालकर ये जता दिया है कि अक्षय भैया शिव नहीं शिव के गण हैं। इसलिए वो उज्जैन रहे या उज्बेकिस्तान, दिल्ली वाली हिन्दी बोलने के लिए स्वतंत्र है।

ट्रेलर का पोस्ट क्रेडिट सबसे शानदार बना है, दो कचौड़ी के बदले अक्षय कुमार कचौड़ी वाले को आशीर्वाद दे रहे हैं और वो साक्षात शिव (?) से पैसे माँग रहा है!

कुछ साल पहले मैंने सोचा था कि कैसा हो बनारस शहर में अचानक एक 9 फिट का आदमी, भभूत मले, बड़ी-बड़ी गुथी हुई जटायें लिए इधर-उधर झूमता निकलता पाया जाए तो लोग उसे महादेव मानेंगे या कोई मेकअप किया हुआ नट?

हम मूर्तिपूजन में कहीं इतने लीन तो नहीं हो गए हैं न कि साक्षात भोलेनाथ दर्शन दे दें तो भी हमें यही लगे कि कोई फ़र्ज़ी आदमी है?

आपके सामने अगर कोई ऐसा व्यक्ति आ जाए, तो आपका नज़रिया क्या होगा? ईमानदारी से बताएं!
आगे आप ट्रेलर देख लें
https://youtu.be/Y6ZKXqM7HNQ

#सहर

मुफ्त की चीज़ें ✅जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो,तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। नोबेल विजेता डेसमंड ट...
06/08/2023

मुफ्त की चीज़ें ✅

जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो,तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
नोबेल विजेता डेसमंड टुटू ने एक बार कहा था कि जब मिशनरी अफ्रीका आए तो उनके पास बाईबल थी और हमारे पास जमीन, उनहोंने कहा 'हम आपके लिए प्रार्थना करने आये हैं’ हमने आखें बंद कर लीं जब खोलीं तो हमारे हाथ में बाईबल थी और उनके पास हमारी जमीन।

जब मोबाइल आया तो उन्होंने कहा कर लो दुनियां मुठ्ठी में,
अब दुनिया तो अपने जगह ही है लेकिन हम उनके मुठ्ठी में आ गए।

इसी तरह जब सोशल नैटवर्क साइट्स आईं, तो उनके पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे और हमारे पास आजादी और निजता थी उन्होंनें कहा 'ये मुफ्त है’ हमने आखें बंद कर लीं, और जब खोलीं तो हमारे पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे और उनके पास हमारी आजादी और निजी जानकारियां।
जब भी कोई चीज मुफ्त होती है, तो उसकी कीमत हमें हमारी आजादी दे कर चुकानी पड़ती है..☺️☺️

इसी लिए मुफ्त की चीज़ें लेने से पहले सोचने की जरूरत है।

#नेतागिरी
#जियो
#मुफ्त

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