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Amar Motors Deals in all types of Automotive Tires, Batteries, Lubricants

28/10/2022

आज से कोई 6 साल पुरानी बात है, 2016 की

रेलवे के एक बड़े अधिकारी थे, बहुत बड़े वाले

पेशे से इंजीनियर थे

उनके रिटायरमेंट में सिर्फ दो साल बचे थे

आमतौर पे रिटायरमेंट के नज़दीक जब अंतिम पोस्टिंग का समय आता है तो कर्मचारी से उसकी पसंद पूछ ली जाती है

पसंद की जगह अंतिम पोस्टिंग इसलिये दी जाती है ताकि कर्मचारी अपने अंतिम दो साल में पसंद की जगह घर मकान इत्यादि बनवा ले और रिटायर हो के सेटल हो जाये व आराम से रह सके पर उस अधिकारी ने अपनी अंतिम पोस्टिंग मांग ली ICF चेन्नई में

ICF बोले तो Integral Coach Factory मने रेल के डिब्बे बनाने वाला कारखाना

चेयरमैन रेलवे बोर्ड ने उनसे पूछा कि क्या इरादा है ?

वो इंजीनियर बोला अपने देश की अपनी खुद की सेमी हाई स्पीड ट्रेन बनाने का इरादा है

ये वो दौर था जब देश मे 180Km प्रति घंटा दौड़ने वाले Spanish Talgo कंपनी के रेल डिब्बों का ट्रायल चल रहा था

ट्रायल सफल था पर वो कंपनी 10 डिब्बों के लगभग 250 करोड़ रु मांग रही थी और तकनीक स्थानांतरण का करार भी नही कर रही थी

ऐसे में उस इंजीनियर ने ये संकल्प लिया कि वो अपने ही देश मे स्वदेशी तकनीक से Talgo से बेहतर ट्रेन बना लेगा उसके आधे से भी कम दाम में

चेयरमैन रेलवे बोर्ड ने पूछा Are You Sure, We Can Do It ?
Yes Sir

कितना पैसा चाहिये R&D के लिये ?
सिर्फ 100 करोड़ रु सर

रेलवे ने उनको ICF में पोस्टिंग और 100 करोड़ रु दे दिया

उस अधिकारी ने आनन फानन में रेलवे इंजीनियर्स की एक टीम खड़ी की औऱ सभी काम मे जुट गए

दो साल के अथक परिश्रम से जो नायाब प्रॉडक्ट तैयार हुआ उसे हम ट्रेन 18 बोले तो वन्दे भारत रेक के नाम से जानते हैं

और जानते हैं 16 डब्बे की इस ट्रेन 18 की लागत कितनी आई ?

सिर्फ 97 करोड़ जबकि Talgo सिर्फ 10 डिब्बों के 250 करोड़ माँग रही थी

ट्रेन 18 भारतीय रेल के गौरवशाली इतिहास का सबसे नायाब हीरा है

इसकी विशेषता ये है कि इसे खींचने के लिए किसी इंजन की ज़रूरत नही पड़ती क्योंकि इसका हर डिब्बा खुद ही सेल्फ प्रोपेल्ड है, बोले तो हर डिब्बे में मोटर लगी है

दो साल में तैयार हुए पहले रैक को वन्दे भारत ट्रेन के नाम से वाराणसी नई दिल्ली के बीच चलाया गया

उस होनहार इंजीनियर का नाम था सुधांशु मनी साहब

2018 में ही Retire हो गये

इस देश में ट्रेन 18 जैसी विलक्षण उपलब्धि के लिये उनकी टीम की किसी ने पीठ तक न थपथपाई

पिछले दिनों जब वन्दे भारत भैंस से टकरा गई और उसका अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया तो सब ट्रेन के डिज़ाइन की अनर्गल आलोचना करने लगे तब सुधांशु सर का दर्द छलक आया और उन्होंने एक लेख लिख उसके डिजाइन की खूबियां बताईं...

मनी साहब सेवानिवृत्त होकर आजकल लखनऊ में रहते हैं

28/10/2022

कभी इंग्लैंड की ब्यूरोक्रेट्स ऑफिसों में बोर्ड लगा होता था "Dogs and Indians are not allowed" लेकिन समय का चक्र तो देखिए दोनों इंग्लैंड के सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं......🙏🙏🙏

28/10/2022

#तक्षशिला_विश्वविद्यालय (Takshashila university)
तक्षशिला विश्वविद्यालय की स्थापना लगभग 2700 साल पहले की गई थी.. इस विश्विद्यालय में लगभग 10500 विद्यार्थी पढ़ाई करते थे.. इनमें से कई विद्यार्थी अलग-अलग देशों से ताल्लुुक रखते थे.. वहां का अनुशासन बहुत कठोर था.. राजाओं के लड़के भी यदि कोई गलती करते तो पीटे जा सकते थे.. तक्षशिला राजनीति और शस्त्रविद्या की शिक्षा का विश्वस्तरीय केंद्र था .. वहां के एक शस्त्रविद्यालय में विभिन्न राज्यों के 103 राजकुमार पढ़ते थे...!!

आयुर्वेद और विधिशास्त्र के इसमे विशेष विद्यालय थे.. कोसलराज प्रसेनजित, मल्ल सरदार बंधुल, लिच्छवि महालि, शल्यक जीवक और लुटेरे अंगुलिमाल के अलावा चाणक्य और पाणिनि जैसे लोग इसी विश्वविद्यालय के विद्यार्थी थे.. कुछ इतिहासकारों ने बताया है.. कि तक्षशिला विश्विद्यालय नालंदा विश्वविद्यालय की तरह भव्य नहीं था.. इसमें अलग-अलग छोटे-छोटे गुरुकुल होते थे.. इन गुरुकुलों में व्यक्तिगत रूप से विभिन्न विषयों के आचार्य विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करते थे...!!

25/10/2022
21/10/2022
21/10/2022

Wow 😍

07/10/2022

समयसूचक AM और PM का उदगम
भारत ही था। पर हमें बचपन से यह रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दों AM और PM का मतलब होता है :
AM : एंटी मेरिडियन (ante meridian)
PM : पोस्ट मेरिडियन (post meridian)
एंटी यानि पहले, लेकिन किसके?
पोस्ट यानि बाद में, लेकिन किसके?
यह कभी साफ नहीं किया गया, क्योंकि यह चुराये गये शब्द का लघुतम रूप था।
अध्ययन करने से ज्ञात हुआ और हमारी प्राचीन संस्कृत भाषा ने इस संशय को अपनी आंधियों में उड़ा दिया और अब, सब कुछ साफ-साफ दृष्टिगत है।
कैसे?
देखिये...
AM = आरोहनम् मार्तण्डस्य Aarohanam Martandasya
PM = पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasya
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सूर्य, जो कि हर आकाशीय गणना का मूल है, उसीको गौण कर दिया। अंग्रेजी के ये शब्द संस्कृत के उस 'मतलब' को नहीं इंगित करते जो कि वास्तव में है।
आरोहणम् मार्तण्डस्य Arohanam Martandasaya यानि सूर्य का आरोहण (चढ़ाव)।
पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasaya यानि सूर्य का ढलाव।
दिन के बारह बजे के पहले सूर्य चढ़ता रहता है - 'आरोहनम मार्तण्डस्य' (AM)।
बारह के बाद सूर्य का अवसान/ ढलाव होता है - 'पतनम मार्तण्डस्य' (PM)।
पश्चिम के प्रभाव में रमे हुए और पश्चिमी शिक्षा पाए कुछ लोगों को भ्रम हुआ कि समस्त वैज्ञानिकता पश्चिम जगत की देन है।

07/10/2022
02/10/2022

हल्दीघाटी के युद्ध में बिना किसी सैनिक के राणा अपने पराक्रमी चेतक पर सवार हो कर पहाड़ की ओर चल पडे‌. उनके पीछे दो मुग़ल सैनिक लगे हुए थे, परन्तु चेतक ने अपना पराक्रम दिखाते हुए रास्ते में एक पहाड़ी बहते हुए नाले को लाँघ कर प्रताप को बचाया जिसे मुग़ल सैनिक पार नहीं कर सके. चेतक द्वारा लगायी गयी यह छलांग इतिहास में अमर हो गयी इस छलांग को विश्व इतिहास में नायब माना जाता है.

चेतक ने नाला तो लाँघ लिया, पर अब उसकी गति धीरे-धीरे कम होती जा रही थी पीछे से मुग़लों के घोड़ों की टापें भी सुनाई पड़ रही थी उसी समय प्रताप को अपनी मातृभाषा में आवाज़ सुनाई पड़ी, ‘नीला घोड़ा रा असवार’ प्रताप ने पीछे पलटकर देखा तो उन्हें एक ही अश्वारोही दिखाई पड़ा और वह था, उनका सगा भाई शक्तिसिंह. प्रताप के साथ व्यक्तिगत मतभेद ने उसे देशद्रोही बनाकर अकबर का सेवक बना दिया था और युद्धस्थल पर वह मुग़ल पक्ष की तरफ़ से लड़ता था. जब उसने नीले घोड़े को बिना किसी सेवक के पहाड़ की तरफ़ जाते हुए देखा तो वह भी चुपचाप उसके पीछे चल पड़ा, परन्तु केवल दोनों मुग़लों को यमलोक पहुँचाने के लिए. जीवन में पहली बार दोनों भाई प्रेम के साथ गले मिले थे.

इस बीच चेतक इमली के एक पेड़ तले गिर पड़ा, यहीं से शक्तिसिंह ने प्रताप को अपने घोड़े पर भेजा और वे खुद चेतक के पास रुके. चेतक लंगड़ा (खोड़ा) हो गया, इसीलिए पेड़ का नाम भी खोड़ी इमली हो गया. कहते हैं, इमली के पेड़ का यह ठूंठ आज भी हल्दीघाटी में उपस्थित है.

चेतक का पराक्रम

महाराणा प्रताप के इतिहास के अनुसार, माना जाता है कि महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था. उनके कवच, भाला, ढाल और दो तलवारों का वजन मिलाकर कुल वजन 208 किलो था. महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लम्बाई 7 फीट 5 इंच थी.

चेतक के पराक्रम का पता इस बात से चलता था कि हल्दीघाटी का युद्ध शुरू हुआ तो चेतक ने अकबर के सेनापति मानसिंह के हाथी के सिर पर पांव रख दिए और प्रताप ने भाले से मानसिंह पर सीधा वार किया. चेतक के मुंह के आगे हाथी कि सूंड लगाई जाती थी.

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