Automobile Industry Contract Workers Union

Automobile Industry Contract Workers Union Automobile industry contract workers union is a sector based union of workers

*ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री कॉण्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन गुडगाँव से लेकर भिवाड़ी तक फैले ऑटोबाइल उद्योग के मज़दूरों की सेक्टरगत यूनियन है।*

27/02/2026

बीते 12 फ़रवरी को चार लेबर कोड के विरुद्ध आयोजित देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में गुड़गाँव (हरियाणा) के लघु सचिवालय पर प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इसके बाद छोटी रैली निकाल कर प्रदर्शन का समापन किया गया। इस प्रदर्शन में ऑटोमोबाइल उद्योग अस्थायी मज़दूर यूनियन ने भी भागीदारी की। ऑटोमोबाइल सेक्टर की विभिन्न कम्पनियों की यूनियनों के पदाधिकारियों और मज़दूरों ने बात रखी।

लेबर कोड के विरुद्ध संघर्ष तेज़ करो!

इस काले क़ानून के ख़िलाफ़ अनिश्चितकालीन आम हड़ताल ही संघर्ष का एकमात्र रास्ता है!

पानीपत रिफ़ाइनरी के मज़दूरों की सभी जायज़ माँगों को पूरा करो !हर ज़ोर-ज़ुल्म की टक्कर में, संघर्ष हमारा नारा है!हरियाणा ...
27/02/2026

पानीपत रिफ़ाइनरी के मज़दूरों की सभी जायज़ माँगों को पूरा करो !

हर ज़ोर-ज़ुल्म की टक्कर में, संघर्ष हमारा नारा है!

हरियाणा में पानीपत स्थित 'इण्डियन ऑयल कॉरपोरेशन लिनिटेड' (IOCL) की रिफ़ाइनरी में काम करने वाले हज़ारों मज़दूरों को अमानवीय हालात से तंग आकर हड़ताल को मजबूर होना पड़ा। 23 फ़रवरी को रिफ़ाइनरी के विस्तार और निर्माण कार्य में लगे ठेका मज़दूरों ने अपनी जायज़ माँगों को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया और काम बन्द कर दिया। यहाँ कार्यरत मज़दूर काम के घण्टे, ओवरटाइम, परिवहन व्यवस्था, शौचालय की सुविधा, ईएसआई-पीएफ़, कैण्टीन की सुविधा, सुरक्षा कर्मियों के खराब व्यवहार आदि जैसे मुद्दों को लम्बे समय से उठा रहे थे। लेकिन रिफ़ाइनरी प्रशासन ने इनकी माँगों पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस असंवेदनशील रवैये से तंग आकर और दुर्घटना में दो मज़दूरों की मौत की ख़बर फैलने तथा एक के बुरी तरह घायल होने के बाद उनके सब्र का बाँध टूट गया। उन्होंने शान्तिपूर्ण प्रदर्शन और हड़ताल का रास्ता अपनाया, पर मैनेजमेंट के आदेश पर पुलिस और सीआईएसएफ़ (CISF) के जवान मुस्तैदी के साथ मज़दूरों को कुचलने में जुट गये। लेकिन मज़दूरों के बुलन्द हौसलों को तोड़ने में नाकाम होने की स्थिति में "बातचीत" द्वारा समाधान निकालने की बात कही गयी। हालिया जानकारी के अनुसार यह "बातचीत" भी बेनतीजा रही।

हरियाणा के पानीपत में स्थित इस रिफ़ाइनरी की विभिन्न इकाइयों और विस्तार योजनाओं में 30 हज़ार से ज़्यादा मज़दूर-कर्मचारी काम करते हैं। इनमें से ज़्यादातर श्रमिक ठेकेदारों के तहत कार्यरत हैं। दमन और शोषण का सबसे ज़्यादा सामना इन्हीं ठेका श्रमिकों को करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार यहाँ की कुल रिफ़ाइनिंग क्षमता लगभग 15 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) तक पहुँच चुकी है लेकिन हज़ारों ठेका मज़दूर, जो इस रिफ़ाइनरी के निर्माण, रखरखाव और उत्पादन कार्यों में लगे हैं, आज अपने बुनियादी अधिकारों तक से महरूम हैं। यहाँ कार्यरत मज़दूरों के आरोप हैं कि उन पर 12-12 घण्टे काम कराने का दबाव बनाया जाता है, ओवरटाइम का सही भुगतान नहीं होता, वेतन में देरी होती है, ईएसआई-पीएफ़ जैसे अधिकार सही तरीके से नहीं मिलते और आवाज़ उठाने पर ठेकेदारों द्वारा काम से निकालने की धमकियाँ दी जाती हैं।काम करने के हालात बेहद अमानवीय हैं। मज़दूरों को पीने का साफ़ पानी, शौचालय, परिवहन, कैण्टीन और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी ठीक से नहीं मिलती हैं। रिफ़ाइनरी जैसे संवेदनशील और जोखिमपूर्ण कार्यस्थल पर इन अमानवीय हालात में मज़दूरों से काम लिया जाना सीधे तौर पर उनके जीवन के साथ खिलवाड़ है। ध्यान रहे, मज़दूरों के ये हालात तो तब हैं जब मज़दूर-कर्मचारी विरोधी चार लेबर कोड अभी लागू नहीं हुए हैं। ये लेबर कोड लागू होने के बाद मज़दूरों की स्थिति का अन्दाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है।

ऑटोमोबाइल उद्योग अस्थायी मज़दूर यूनियन (AICWU) की ओर से पानीपत रिफ़ाइनरी के मज़दूरों की सभी माँगों का पुरज़ोर समर्थन करते हैं। हम रिफ़ाइनरी प्रशासन और सरकार से माँग करते हैं मज़दूरों की सभी माँगों को तत्काल प्रभाव से पूरा किया जाया मज़दूरों पर किसी भी तरह की बदले की या दमन की कार्रवाई को तत्काल रोका जाये।

ऑटोमोबाइल उद्योग अस्थायी मज़दूर यूनियन (AICWU) और गुड़गाँव मज़दूर संघर्ष समिति (GMSS) पानीपत रिफ़ाइनरी के मज़दूरों के संघर्ष के साथ हैं और मज़दूरों की इन सभी माँगों को पूरा करने की माँग करते हैं:

1. काम के घण्टे 8 किये जाये और इन्हें सख़्ती से लागू किया जाये।

2. वेतन का भुगतान हर महीने की 1 से 7 तारीख़ के बीच पक्का किया जाये और 240 दिन पूरे होने पर पूरी देय राशि का भुगतान तुरन्त किया जाये।

3. कम्पनी के बोर्ड रेट के अनुसार वेतन दिया जाये और प्रॉविडेंट फ़ण्ड (PF) की रकम श्रमिक के बराबर और नियमित रूप से जमा की जाये।

4. ओवरटाइम का भुगतान डबल रेट से किया जाये।

5. काम के दौरान किसी भी दुर्घटना की स्थिति में कम्पनी पूरी ज़िम्मेदारी ले और उचित मुआवज़ा दे।

6. पुलिस द्वारा उठाये गये सभी मज़दूर साथियों को तत्काल रिहा किया जाये।

7. सभी राष्ट्रीय अवकाश मज़दूरों को दिये जायें।

8. मासिक ड्यूटी 26 कार्यदिवस तय की जाये।

9. कार्यस्थल पर शौचालय और स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाये।

20/02/2026

मुनाफ़े की अंधी हवस ने ली 9 मज़दूरों की जान!

16 फ़रवरी 2026, राजस्थान के भिवाड़ी के खुशखेड़ा-करौली औद्योगिक क्षेत्र में सुबह 9 बजे एक भयानक धमाका हुआ। एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में काम कर रहे करीब 25 मज़दूरों में से 9 मज़दूर ज़िंदा जल गए… 4 गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज दिल्ली के अस्पतालों में चल रहा है।

यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी औद्योगिक क्षेत्र में टैंकर कंपनी विस्फोट, इंक फैक्ट्री धमाका और फार्मास्युटिकल प्लांट में आग जैसी घटनाओं में कई मज़दूर अपनी जान गंवा चुके हैं।

सरकारी आँकड़े बताते हैं कि पिछले पाँच वर्षों में हज़ारों मज़दूर फैक्ट्री और निर्माण स्थलों पर हादसों में मारे गए। लेकिन सज़ा? बेहद कम।
Factories Act, 1948 के तहत हज़ारों मामलों में दोष सिद्ध हुए, पर सज़ा सिर्फ़ मुट्ठीभर लोगों को मिली।

अब नई श्रम संहिताएँ, जैसे Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 सुरक्षा प्रावधानों को और ढीला करने का रास्ता खोल रही हैं। सवाल है — क्या मज़दूरों की जान इतनी सस्ती है? क्या मुनाफ़े की इस व्यवस्था में इंसान की कोई कीमत नहीं?

ऑटोमोबाइल उद्योग अस्थायी मज़दूर यूनियन मांग करती है:

हर कारखाने में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम हों।

दोषी मालिकों को सख़्त सज़ा मिले।

मृतक मज़दूरों के परिवारों को 50 लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाए।

यह हादसा नहीं… एक चेतावनी है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल हर फैक्ट्री “मौत का कारख़ाना” बन सकती है। मज़दूरों की सुरक्षा, उनका अधिकार है — कोई एहसान नहीं।

मुनाफ़े की अन्धी हवस ने ली 9 मज़दूरों की जान!16 फ़रवरी (2026) को भिवाड़ी के खुशखेड़ा-करौली औद्योगिक क्षेत्र (राजस्थान) क...
18/02/2026

मुनाफ़े की अन्धी हवस ने ली 9 मज़दूरों की जान!

16 फ़रवरी (2026) को भिवाड़ी के खुशखेड़ा-करौली औद्योगिक क्षेत्र (राजस्थान) की एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में सुबह 9 बजे भयंकर हादसा हुआ। घटना के समय करीब 25 मज़दूर काम कर रहे थे, जिसमें 9 मज़दूरों के ज़िन्दा जलने और 4 मज़दूरों के गम्भीर रूप से घायल होने की सूचना है। गम्भीर रूप से घायल मज़दूरों को दिल्ली के एम्स और सफदरजंग अस्पताल में भेज दिया गया है। मरने वाले सभी मज़दूर बिहार से हैं और उनके नाम इस प्रकार हैं: सुजंत, मिंटू, अजीत, रवि, श्याम, अमरेश, शिव, शशिभूषण।

धमाके इतना भयानक थे कि गेट टूट कर दूर जा गिरा। इमारत के सारे शीशे टूट गये, जिसके बाद फैक्ट्री से आग की लपटें उठने लगी। इस कारण बचाव कार्य करने में समय लग रहा था। आग पर काबू पाने के लिए क़रीब छह दमकल गाड़ियों का इस्तेमाल करना पड़ा। डेढ़ घण्टे के बाद आग पर काबू पाया जा सका। मौके पर पहुँची फोरेंसिक टीम ने फैक्ट्री से हड्डी व जले हुए पटाखों के नमूने लिए हैं। कईं लाशें पूरी तरह जल कर पिघल चुकी हैं। उन्हें पॉलीथीन में ले जाने पड़ा ताकि पहचान के लिए डीएनए करवाकर परिजनों को सौंपा जा सके।

इस अवैध पटाखा फैक्ट्री में बारूद, पटाखे और पैकिंग के डिब्बे मिले हैं। यहाँ ग़ैरकानूनी तरीके से पटाखे बनाने का काम गेट पर ताले लगाकर किया जा रहा था। इलाक़े के लोगों ने बताया कि फैक्ट्री में पहले भी तीन बार धमाका हो चुके हैं। ऐसी अवैध फैक्ट्री का चलना कम्पनी और प्रशासन के गठजोड़ से सम्भव है। इस घटना के बाद से कम्पनी मालिक फ़रार है और मैनेजर को हिरासत में लेकर, फैक्ट्री को सील कर दिया गया है। वहीं राज्य सरकार जाँच के लिए कमेटी का गठन करने की नौटंकी कर रही है। बता दें कि इस इलाक़े में पहले भी लगातार औद्योगिक दुर्घटनाएँ होती रही हैं। इससे पहले टैंकर कम्पनी में हुए विस्फोट में 16 लोगों की मौत हो गयी थी। 18 मार्च 2025 को इंक फैक्ट्री में धमाके से एक मज़दूर की मौत हुई थी और एक के घायल हुआ था। अक्तूबर 2025 में फार्मास्युटिकल प्लाण्ट में आग में 4 मज़दूरों की मौत हुई थी और 12 मज़दूर घायल हुए थे।

यह सब महज़ दुर्घटनाएँ नहीं मालिकों व इस पूँजीवादी व्यवस्था द्वारा की जाने वाली निर्मम हत्याएँ हैं। आये-दिन कीड़े-मकौड़ों की तरह कारख़ानों में मज़दूरों को मरने के लिए पूँजीपति मज़बूर करते हैं। श्रम मन्त्रालय की एक रिपोर्ट बताती है कि बीते पाँच वर्षो में 6500 मज़दूर फैक्ट्री, खदानों, निर्माण कार्य में हुए हादसों में अपनी जान गवाँ चुके हैं। इसमें से 80 प्रतिशत हादसे कारखानों में हुए। 2017-2018 कारखाने में होने वाली मौतों में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। साल 2017 और 2020 के बीच, भारत के पंजीकृत कारखानों में दुर्घटनाओं के कारण हर दिन औसतन तीन मज़दूरों की मौत हुई और 11 घायल हुए। 2018 और 2020 के बीच कम से कम 3,331 मौतें दर्ज़ की गयी। आँकड़ों के मुताबिक, फैक्ट्री अधिनियम, 1948 की धारा 92 (अपराधों के लिए सामान्य दण्ड) और 96ए (ख़तरनाक प्रक्रिया से सम्बन्धित प्रावधानों के उल्लंघन के लिए दण्ड) के तहत 14,710 लोगों को दोषी ठहराया गया, लेकिन आँकड़ों से पता चलता है कि 2018 और 2020 के बीच सिर्फ़ 14 लोगों को फैक्ट्री अधिनियम, 1948 के तहत अपराधों के लिए सज़ा दी गयी। यह आँकड़े सिर्फ़ पंजीकृत फैक्ट्रियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि दिल्ली और पूरे देश में लगभग 90 फ़ीसदी श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े हैं और अनौपचारिक क्षेत्र में होने वाले हादसों के बारे में कोई पुख़्ता आँकड़े नहीं हैं।

केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा के द्वारा पारित की गई चार श्रम संहिताओं में ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियाँ संहिता, 2020’ में तो आगजनी से निपटने से जुड़े सारे प्रावधान सरकार द्वारा जारी सूचनाओं पर छोड़ दिये गये हैं, यानी चार लेबर कोड लागू होने के बाद मज़दूरों के लिए सुरक्षा के इन्तजाम और ढीले कर दिये जायेंगे। इससे औद्योगिक घटनाओं में बढोत्तरी ही होंगी और मज़दूरों को सरकारों के रहमोकरम पर निर्भर रहना होगा। इसलिए आज हम मज़दूरों के सामने सवाल यह है कि वे आख़िर कब तक पूँजीपतियों के मुनाफ़े की भट्टी में झोंके जाने को बर्दाश्त करते रहेंगे? इससे पहले कि सभी कारख़ाने 'मौत के कारख़ानों' में तब्दील हो जाये हमें मालिकों की व्यवस्था को ख़ाक में मिलाने के लिए एकजुट होना होगा और ऐसे हादसो के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ को बुलन्द करना होगा।

ऑटोमोबाइल उद्योग अस्थायी मज़दूर (AICWU) यूनियन माँग करती है कि:
- कारख़ानों में सुरक्षा के पुख़्ता इन्तज़ाम किये जायें।
- दोषी मालिकों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाये।
- मारे गये मज़दूरों के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाये।

चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ गुड़गाँव में प्रदर्शन और रैली का आयोजन!12 फ़रवरी को चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ देशव्यापी आम हड़ताल ...
13/02/2026

चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ गुड़गाँव में प्रदर्शन और रैली का आयोजन!

12 फ़रवरी को चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ देशव्यापी आम हड़ताल के समर्थन में गुड़गाँव के डीसी ऑफ़िस पर प्रदर्शन का आयोजन किया गया। ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री काण्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (AICWU) और गुड़गाँव मज़दूर संघर्ष समिति (GMSS) द्वारा प्रदर्शन में भागीदारी की गयी। प्रदर्शन में मुख्यत: ऑटोमोबाइल सेक्टर के स्थायी-अस्थायी मज़दूर शामिल रहे।

सभा में विभिन्न कम्पनियों व फ़ेडरेशनों के वक्ताओं ने अपनी बात रखी। सभा के बाद डीसी ऑफ़िस से रैली निकाली गयी। राजीव चौक, ओल्ड रेलवे रोड से गुज़रते हुए, गुरुद्वारा रोड चौक पर सभा करके रैली का समापन किया गया। सभा के अन्त में तय किया गया कि संघर्ष को आगे बढ़ाने की योजना सभी यूनियनों की साझा मीटिंग करके तय की जायेगी।

चार लेबर कोड के ज़रिये मोदी सरकार ने आज़ादी के बाद श्रम अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला किया है। इन संहिताओं के द्वारा सभी अस्थायी-स्थायी मज़दूरों-कर्मचारियों के अधिकारों का समाप्त कर दिया गया है। मज़दूरों के पक्के रोज़गार, वेतन और कार्यस्थलों की सुविधा-सुरक्षा के हक़ों को भी निष्प्रभावी बना दिया गया है। साथ ही ईएसआई, पीएफ़, बीमा, पेंशन, मातृत्व लाभ जैसी सामाजिक सुरक्षा तथा यूनियन व हड़ताल के अधिकारों को भी चार लेबर कोड के माध्यम से काफ़ी हद तक छीन लिया गया है।

अगर मोदी सरकार को चार लेबर कोड वापस लेने के लिए मजबूर करना है, तो मज़दूर-कर्मचारी आबादी को अनिश्चितकालीन आम हड़ताल के लिए एकजुट करना ही होगा। इसके लिए केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों व संघों को पहलक़दमी लेनी पड़ेगी क्योंकि अभी भी उनके पास ही संगठित मज़दूरों-कर्मचारियों की ताक़त सबसे ज़्यादा है। ऑटोमोबाइल उद्योग अस्थायी मज़दूर यूनियन सभी यूनियनों, संघों व फ़ेडरेशनों से अपील करती है कि हमें अपने सभी मतभेदों को भुलाकर लेबर कोड रद्द करवाने के लिए साथ आना होगा और तत्काल अनिश्चितकालीन आम हड़ताल की ओर बढ़ना होगा, तभी हम मोदी सरकार को अपनी ताक़त दिखाकर लेबर कोड वापस लेने के लिए मजबूर कर सकते हैं।

विरोध-प्रदर्शन में मारुति सुज़ुकी बाइक यूनियन, मारुति सुज़ुकी यूनियन उद्योग विहार, मारुति सुज़ुकी यूनियन मानेसर, मारुति सुज़ुकी पावर ट्रेन यूनियन, होण्डा यूनियन, सत्यम ऑटो यूनियन, मुंजाल क्रियू यूनियन, स्काई यूनियन, मुंजाल सोवा यूनियन, एस आर एस यूनियन, पी एण्ड राइटर यूनियन, हीरो मोटो यूनियन, केरियर यूनियन, ढिंगाणिया यूनियन, हाईलेक्स यूनियन, सुब्रोश यूनियन, कपारो मारुति यूनियन, मेट्रो यूनियन, हेमा यूनियन, क्यूं एच टालब्रॉस यूनियन, ल्यूमैक्स यूनियन, परफेटी यूनियन, शिवम् आटो यूनियन बिनौला, बजाज मोटर्स यूनियन बिनौला, बजाज मोटर्स यूनियन गुरुग्राम, एमॉजान वर्कर्स यूनियन आदि यूनियनों ने भागीदारी की।

लेबर कोड के विरुद्ध संघर्ष तेज़ करो!इस काले क़ानून के ख़िलाफ़ अनिश्चितकालीन आम हड़ताल ही संघर्ष का एकमात्र रास्ता है!आज 12 फ़र...
12/02/2026

लेबर कोड के विरुद्ध संघर्ष तेज़ करो!
इस काले क़ानून के ख़िलाफ़ अनिश्चितकालीन आम हड़ताल ही संघर्ष का एकमात्र रास्ता है!

आज 12 फ़रवरी को चार लेबर कोड के विरुद्ध आयोजित देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में गुड़गाँव (हरियाणा) के लघु सचिवालय पर प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इसके बाद छोटी रैली निकाल कर प्रदर्शन का समापन किया गया। इस प्रदर्शन में ऑटोमोबाइल उद्योग अस्थायी मज़दूर यूनियन ने भी भागीदारी की। प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें साझा कर रहे हैं।

(विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही डाली जायेगी।)

12/02/2026

चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ गुड़गाँव में निकाली गयी रैली।

12/02/2026

चार लेबर कोड के खिलाफ गुड़गांव में प्रदर्शन।

12/02/2026

चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में लघु सचिवालय (गुड़गाँव) पर आयोजित प्रदर्शन में नारे उठाते साथी शाम।

12/02/2026

मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में गुड़गाँव के लघु सचिवालय पर प्रदर्शन की शुरुआत हो चुकी है।

मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करो!चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ अभियान जारी है!10-11 फ़रवरी को धारूहेड़ा में हीरो कम्पनी व म...
12/02/2026

मज़दूर विरोधी चार लेबर कोड रद्द करो!

चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ अभियान जारी है!

10-11 फ़रवरी को धारूहेड़ा में हीरो कम्पनी व मानेसर में मारुति कम्पनी के पास चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ अभियान चलाया गया। मज़दूरों से अपील की गयी कि 12 फ़रवरी को होने वाले एकदिवसीय हड़ताल में भागीदारी करें और उसे सफ़ल बनाये। साथ ही चार लेबर कोड रद्द करवाने के लिए अनिश्चितकालीन आम हड़ताल की ओर आगे बढ़ें।

12 फ़रवरी की एकदिवसीय हड़ताल को सफ़ल बनाते हुए अनिश्चितकालीन आम हड़ताल की ओर आगे बढ़ो।12 फ़रवरी को होने वाले एकदिवसीय हड...
11/02/2026

12 फ़रवरी की एकदिवसीय हड़ताल को सफ़ल बनाते हुए अनिश्चितकालीन आम हड़ताल की ओर आगे बढ़ो।

12 फ़रवरी को होने वाले एकदिवसीय हड़ताल को सफल बनाने हेतु गुड़गाँव, मानेसर व धारूहेड़ा के औद्योगिक इलाक़ों में पोस्टरिंग की गयी।

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