MM Motors CNG Amravati

MM Motors CNG Amravati RTO & GOVT Approved CNG / LPG KIT FITMENT CENTRE AMRAVATI MAHARASHTRA

09/05/2026
वर्तमान में CNG (कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस) से चलने वाली गाड़ियां कम खर्च और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर ऑप्शन बन गई है। इसके...
28/01/2026

वर्तमान में CNG (कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस) से चलने वाली गाड़ियां कम खर्च और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर ऑप्शन बन गई है। इसके साथ ही बढ़ती कीमतों की वजह से भी बहुत से लोग CNG कार लेना पसंद कर रहे है। यह गाड़ियां जितना ज्यादा माइलेज देती है, लेकिन इनको मेंटेन उतना ही ज्यादा करना पड़ता है। हम यहां पर आपको CNG कार के मेंटेनेस और सेफ्टी टिप्स के बारे में विस्तार में बता रहे हैं।

CNG फिल्टर क्या होता है और जरूरी क्यों है?
CNG फिल्टर, CNG फ्यूल सिस्टम का एक अहम हिस्सा होता है, जो गैस में मौजूद गंदगी, नमी और छोटे कणों को इंजन में जाने से रोकता है। जैसे पेट्रोल कार में फ्यूल फिल्टर जरूरी होता है, वैसे ही CNG में भी फिल्टर इंजन और फ्यूल सिस्टम को सुरक्षित रखता है।

अगर CNG फिल्टर समय पर बदला न जाए, तो इसकी वजह से इंजन को बड़े नुकसान हो सकते हैं। इसकी वजह से फ्यूल एफिशिएंसी कम हो जाता है। इंजन परफॉर्मेंस गिरता है। आइडलिंग अनियमित हो जाता है। इसके साथ ही गंभीर स्थिति में इंजेक्टर या रेगुलेटर जैसी महंगी पार्ट्स खराब होने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार CNG फिल्टर हर 20,000 से 25,000 किमी में बदलना चाहिए ताकि इंजन हेल्थ बनी रहे।

CNG कार की सेफ्टी और मेंटेनेंस के टिप्स
1. CNG किट की रेगुलर चेक करें: हर 3 महीने या 10,000 किमी पर प्रोफेशनल इंस्पेक्शन कराएं> गैस लीकेज चेक करने के लिए साबुन-पानी का घोल कनेक्शन पर लगाएं, अगर बुलबुले बनें तो लीकेज हो सकता है। सभी होज और पाइप में क्रैक, ढीलापन या घिसाव देखें। CNG सिलेंडर और माउंटिंग ब्रैकेट पर जंग या डैमेज चेक करें। CNG सिस्टम से जुड़े इलेक्ट्रिकल कनेक्शन सही और जंग-मुक्त हों। सिलेंडर वाल्व को चेक करें कि वह अटक तो नहीं रहा है।

2. CNG सर्टिफिकेट और कंप्लायंस: वाहन में हमेशा CNG सर्टिफिकेशन डॉक्यूमेंट रखें। CNG फिटनेस सर्टिफिकेट हर पांच साल में रिन्यू कराएं। समय पर हाइड्रोस्टैटिक टेस्ट केवल अधिकृत टेस्टिंग स्टेशन पर करवाएं। CNG सिस्टम की सर्विस/मेंटेनेंस का रिकॉर्ड संभालकर रखें। नियमों के अनुसार आगे और पीछे CNG स्टिकर लगाएं। किट में कोई भी बदलाव सिर्फ अधिकृत सर्विस सेंटर से ही करवाएं।

3. इंजन और परफॉर्मेंस मेंटेनेंस: CNG पेट्रोल की तुलना में हॉट्टर बर्न करती है, इसलिए कुछ पार्ट्स पर असर जल्दी पड़ सकता है। इसके लिए इंजन ऑयल हर 5,000–6,000 किमी में बदलना बेहतर माना गया है। स्पार्क प्लग जल्दी घिसते हैं, इसलिए उन्हें कम अंतराल में बदलें। एयर फिल्टर को नियमित साफ या रिप्लेस करें, ताकि एयर-फ्यूल मिक्स सही रहे। वॉल्व क्लियरेंस सही रखें क्योंकि CNG से वॉल्व पर असर हो सकता है। कूलेंट लेवल पर नजर रखें क्योंकि CNG इंजन ज्यादा गर्म चल सकता है। खासकर पुरानी कारों में 50,000 किमी पर वाल्व सीट रीसैशन इंस्पेक्शन पर ध्यान दें।

4. CNG फिल्टर और फ्यूल सिस्टम की देखभाल: 20,000–25,000 किमी पर CNG फिल्टर रिप्लेस करें। इंजेक्टर की समय-समय पर सफाई करवाएं ताकि फ्यूल एटोमाइजेशन सही रहे। रेगुलेटर की जांच नियमित सर्विस में कराते रहें। फ्यूल लाइन में क्रैक या लीकेज पॉइंट्स पर नजर रखें। CNG-पेट्रोल स्विचिंग स्मूद है या नहीं, यह चेक करें। पेट्रोल और CNG दोनों टैंक के फ्यूल गेज की सटीकता जांचते रहें।

5. CNG सिलेंडर का मेंटेनेंस: अनिवार्य हाइड्रोस्टैटिक टेस्ट हर पांच साल पर कराएं। सिलेंडर माउंटिंग ब्रैकेट में ढीलापन या जंग न हो। सिलेंडर को बार-बार पूरी तरह खाली करना अवॉइड करें, इससे सिस्टम में नमी जा सकती है। सिलेंडर वाल्व और प्रेशर रिलीज डिवाइस की प्रोफेशनल जांच जरूरी है। सिलेंडर की रजिस्ट्रेशन या टेस्टिंग सर्टिफिकेट अपडेट रखें। सिलेंडर इंस्टॉलेशन का एंगल मैन्युफैक्चरर स्पेसिफिकेशन के हिसाब से होना चाहिए।

CNG कार के सेफ्टी के लिए जरूरी टिप्स
CNG सिस्टम में को खुद रिपेयर कभी न करें।
गैस जैसी अजीब गंध आए तो तुरंत जांच करवाएं।
कोशिश करें कि वाहन हवादार जगह पर पार्क हो।
एक्सीडेंट की स्थिति में रेस्क्यू टीम को बताएं कि कार में CNG किट लगी है।
खराब वेंटिलेशन वाले अंडरग्राउंड पार्किंग में जाने से पहले पेट्रोल मोड पर स्विच करें।
लंबे समय तक पार्किंग में CNG सप्लाई बंद रखें।
CNG कार को बेहतर बनाए रखने के आसान टिप्स
1. फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ाने के तरीके: टायर प्रेशर हमेशा सही रखें। CNG या बाय-फ्यूल के लिए सही ग्रेड का इंजन ऑयल इस्तेमाल करें। तेज झटके से एक्सेलरेशन से बचें। जरूरत से ज्यादा आइडलिंग न करें। CNG टैंक को बहुत ज्यादा लो होने से पहले रिफिल करें। कभी-कभी पेट्रोल पर चलाएं ताकि पेट्रोल सिस्टम ठीक रहे। बूट से अनावश्यक सामान हटाएं। बिना जरूरत रूफ रैक हटाएं। स्टेडी स्पीड पर ड्राइव करें।

2. CNG-पेट्रोल स्विचिंग समझें: बहुत ठंड में स्टार्ट करते समय पेट्रोल मोड बेहतर है। इंजन थोड़ा वार्म होने दें फिर CNG पर स्विच करें। हार्ड एक्सेलरेशन के दौरान CNG से पेट्रोल या पेट्रोल से CNG स्विच न करें। समय-समय पर 20–30 किमी पेट्रोल पर चलाएं। पेट्रोल टैंक खाली न रखें ताकि नमी जमा न हो। अगर ट्रांजिशन में झटका या रफनेस आए तो तुरंत चेक कराएं।

3. CNG किट की लाइफ बढ़ाने का तरीका: हमेशा सर्टिफाइड, क्वालिटी किट चुनें। इंस्टॉलेशन सिर्फ अधिकृत और अनुभवी टेक्नीशियन से करवाएं। सर्विस इंटरवल मिस न करें। CNG फिलिंग पॉइंट पर डस्ट कवर रखें। CNG ECU को पानी और इलेक्ट्रिकल फ्लक्चुएशन से बचाएं। सर्विस रिकॉर्ड में रिप्लेसमेंट हिस्ट्री नोट करें। नए वाहनों में सीक्वेंशियल किट बेहतर परफॉर्मेंस और लाइफ दे सकती है।

4. CNG से जुड़ी दिक्कतों को पहचानें: मॉइस्टचर टैप चेक करें कि सिस्टम में पानी ज्यादा तो नहीं है। CNG मोड पर असामान्य आवाज आए तो ध्यान दें। पावर लॉस हो तो इसे हल्के में न लें। हर बड़ी सर्विस/रिपेयर के बाद लीकेज चेक कराएं। माइलेज में गिरावट नजर आए तो डायग्नोसिस कराएं। जरूरत पड़ने पर स्पेशल CNG डायग्नोस्टिक करवाएं। नजदीकी CNG सर्विस सेंटर के इमरजेंसी नंबर रखें।

5. प्रोफेशनल मेंटेनेंस टिप्स: किट लगने के बाद पहला बड़ा सर्विस 10,000 किमी पर करवाएं। हर 20,000 किमी पर CNG ट्यून-अप करवाएं। 1,00,000 किमी पर सिस्टम ओवरहॉल या रेगुलेटर रीबिल्ड करवाएं। साल में एक बार प्रोफेशनल सेंटर पर इलेक्ट्रॉनिक लीकेज टेस्ट करवाएं। साल में दो बार इमिशन टेस्ट करें। लंबी ट्रिप से पहले प्रिवेंटिव मेंटेनेंस जरूर कराएं। रेगुलर कार सर्विस और CNG सर्विस को आपस में कोऑर्डिनेट करें।

इंश्योरेंस और डॉक्यूमेंटेशन से संबंधित टिप्स
ऐसा CNG कार इंश्योरेंस लें, जिसमें CNG किट और सिलेंडर की कवरेज स्पष्ट हो। इंश्योरेंस कंपनी को CNG मॉडिफिकेशन जरूर डिक्लेयर करें, वरना क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। इंस्टॉलेशन सर्टिफिकेट और रसीदें संभालकर रखें। सिलेंडर टेस्टिंग सर्टिफिकेट एक्सपायरी से पहले रिन्यू करें, ताकि इंश्योरेंस वैध रहे। रोडसाइड असिस्टेंस कवरेज पर भी विचार करें। हर इंस्पेक्शन की सर्विस रिपोर्ट रिकॉर्ड में रखें।

CNG फिटेड वाहन का इंश्योरेंस लेते समय सबसे अहम बात यह है कि स्टैंडर्ड पॉलिसी हर बार CNG किट या सिलेंडर को कवर नहीं करती। इसलिए पॉलिसी लेते वक्त CNG मॉडिफिकेशन को साफ तौर पर घोषित करना जरूरी है। कुछ इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे स्पेशलाइज्ड पॉलिसीज ऑफर करती हैं, जिनमें CNG किट इंस्टॉलेशन भी कवर हो सकता है और कैशलेस गैरेज नेटवर्क का सपोर्ट मिलता है। याद रखें, अगर आपने CNG मॉडिफिकेशन की जानकारी इंश्योरर को नहीं दी, तो एक्सीडेंट क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा रहता है।

हमारी राय
CNG कार की देखभाल पेट्रोल कार की तुलना में थोड़ी ज्यादा सतर्कता मांगती है, क्योंकि इसमें फिल्टर, रेगुलेटर, इंजेक्टर और सिलेंडर जैसे कुछ खास पार्ट्स सीधे सेफ्टी और परफॉर्मेंस से जुड़े होते हैं। अगर आप तय समय पर फिल्टर बदलते हैं, रेगुलर इंस्पेक्शन कराते हैं, सेफ्टी नियम मानते हैं और सही इंश्योरेंस लेते हैं, तो आपकी CNG कार लंबे समय तक भरोसेमंद और किफायती बनी रह सकती है।

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