25/02/2024
*शाबान उल मोअज़्ज़म के चंद अमलियात*
इस साल शबे बारात *25 फ़रवरी* *ब रोज़ इतवार* की रात को होगी।
*इंशा अल्लाह अज़्ज़वजल*
*शाबान उल मोअज़्ज़म के रोज़े*
जो लोग 3 रोज़े रखना चाहते हैं उसकी तारीख़ ख्याल रखिए -
*24,25,26 फ़रवरी*
जो लोग दो रोज़े रखना चाहते हैं
वो *25,26 फ़रवरी* को रखें ।
जो सिर्फ एक रोज़ा रखना चाहते हैं । जो के अफ़ज़ल भी है ।
वो *26 फ़रवरी बरोज़ पीर* का रोज़ा रखें ।
*शाबान उल मोअज़्ज़म* की 14 तारीख़ यानी 25 फ़रवरी ब रोज़ इतवार को असर की नमाज़, मगरिब की नमाज़ से पहले 40 मर्तबा *ला हौला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम* और उसके बाद 100 मर्तबा *दरूद शरीफ़* पढ़ें ।
फिर मगरिब की नमाज़ के बाद 2,2 कर के 6 रकात नमाज़ नफ़िल पढ़ें ।
पहली 2 रकात *रिज़्क में बरकत के लिए*
दूसरी 2 रकात *दराज़गिए उम्र के लिए यानी उम्र में बरकत के लिए*
तीसरी 2 रकात *दुनिया की तमाम आफतों बलाओं से बचने के लिए ।*
हर रकात में सुरह फातेहा के बाद जो भी सुरह याद हो पढ़ सकते हैं ।
हर 2 रकात मुकम्मल करने के बाद वहीं बैठ के एक मर्तबा पूरी *सुरह यासीन शरीफ़* पढ़ें। देख के पढ़ें , याद हो तो बिना देखे भी पढ़ सकते हैं । या किसी पढ़ने वाले से सुने ।
इस तरीक़े से पूरी 6 रकात होने पर 3 मर्तबा *यासीन शरीफ़* हो जाएगी ।
उसके बाद अपने अपने घरों में *शबे बारात की फातेहा* का एहतमाम करें ।
फतेहा में *हज़रते ओवेस क़रनी रदि अल्लाहो तआला अन्हो* और *आप के तमाम मरहूमीन जो दुनिया से रुखसत हो चुके हैं* उनका ज़िक्र करें ।
👉 *15 वी शाबान को बाद नमाज़ ए मगरिब गुस्ल के पानी में 7 या 9 बेर की पत्ती डाल के गुस्ल की भी बहुत फज़ीलत है ।*
फ़िर ईशा के बाद *शबे बारात की महफ़िल ए मिलाद में शिरकत करें । मिलाद के बाद कब्रस्तान* जा के कब्रों की ज़ियारत करें । वहां भी *फातेहा दरूदो सलाम* पढ़ें ।
फिर रात भर जाग कर *अल्लाह अज़्ज़वजल* का ज़िक्र, नफ़िल नमाज़ पढ़ें, कज़ा ए उम्री अदा करें ।